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Wednesday, April 3, 2019

इन वजहों से राहुल गाँधी ने छोडी अमेठी लोकसभा सीट

अमेठी उतर भारत के राज्य उतर प्रदेश का एक लोकसभा क्षैत्र है , इस लोकसभा सीट पर शुरु से हि काँग्रेस का दबदबा रहा है पर 2 बार इस सीट पर काँग्रेस को हार भी मिली है  । 1967 से अब तक हुये लोकसभा चुनावों में यहाँ से गाँधी परिवार से राजीव गाँधी , सजंय गाँधी , सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी चुनाव लडे है ।

इन वजहों से राहुल गाँधी ने छोडी अमेठी लोकसभा सीट

सबसे पहले 1967 मे़ अमेठी से काँग्रेस के वी डी वाजपेयी विजयी हुये थे , 1977 में अमेठी लोकसभा से बीएलडी के रविन्द्र प्रताप सिंह ने संजय गाँधी को हराया था , दुसरी बार काँग्रेस को इस सीट से भाजपा के संजय सिंह ने हराया था ।
अब तक अमेठी सीट पर 2 बार उपचुनाव सहित 15 बार चुनाव हुये जिसमें काँग्रेस 13 बार विजयी हुई है ।

अब सवाल यह उठता है कि 13 बार विजयी होने के बाद भी काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अमेठी की सीट छोड़ने का निर्णय क्युं किया ? इस आर्टिकल में इसी का विश्लेषण करेंगे ।

पिछली बार राहुल गाँधी की प्रतिद्वंदी रही भाजपा की स्मृति इरानी से जब इसके बारे में पुछा गया तो उन्होने कहाँ की 2009 में राहुल गाँधी इस सीट से 3 लाख से अधिक वोटों से चुनाव जिते थे और 2014 में मेरे सिर्फ 20 दिन के प्रचार से जीत का अन्तर घटकर 1 लाख तक आ गया था , इस बार उन्हे ये डर है कि ये अन्तर इतना ना हो जाये की वो हार जाये और स्मृति इरानी ने यह भी कहा की काँग्रेस पार्टी के मुख्य नेता इस सीट से जीतकर संसद पहुँचे है फिर भी अमेठी में बिल्कुल भी विकास नही हुआ है , अमेठी अभी भी विकास की नजर से देखे तो पिछड़ा हुआ है ।

इस बार अमेठी की जनता के आक्रोश को देखते हुये राहुल गाँधी ने केरल राज्य की वायनाड लोकसभा सीट से चुनाव लडने का मन बनाया है । राहुल गाँधी अमेठी और वायनाड दोनों लोकसभा सीटो से चुनाव लडने का मन बनाया है ।

इन वजहों से राहुल गाँधी ने छोडी अमेठी लोकसभा सीट

काँग्रेस के नेता रणदीप सुरजेवाला ने वायनाड से राहुल गाँधी  के चुनाव लडने की वजह बताई की वायनाड का एक अनोखा स्वरूप है भोगौलिक और सांस्कृतिक दोनों , इस प्रकार तीनों प्रान्तों का एक साथ प्रतिनिधित्व ये वायनाड का संसदीय क्षैत्र करता है । वहीं इस मुद्दे पर बीजेपी के नेता ने व्यंग्य तरिके से कहा की " डुबते जहाज को देख कर कप्तान भागा " और साथ हि कहा की असहाय और असुरक्षित अमेठी को छोडकर सुरक्षा की आस में वायनाड चले गये है ।

अब सवाल ये उठता है अगर राहुल गाँधी वायनाड और अमेठी दोनों जगहों से चुनाव जीत जाते है तो राहुल गाँधी कोनसी सीट को छोडने का फैसला करेंगे अमेठी या वायनाड ? अगर विशेषज्ञों की माने तो अभी तक प्रियंका गाँधी कहाँ से चुनाव लडेगी ये ऐलान नही हुआ है इसलिए ऐसा माना जा रहा है की राहुल गाँधी अमेठी की सीट प्रियंका गाँधी के लिये छोड़ सकते है ।

2009 में राहुल गाँधी को 72% वोट मिले थे वही ये वोट प्रतिशत 2014 में घटकर 47% हो गया  , हो सकता है यही वजह हो राहुल गाँधी के वायनाड से चुनाव लडने की । साथ हि आपको बता दे स्मृति इरानी ने राहुल गाँधी के वायनाड से चुनाव लडने पर कहा कि "राहुल अमेंठी छोडकर भागे है मैं नही "

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा की "राहुल गाँधी अमेठी की सीट छोडकर भागे है , इस बार उन्हे पता है उनका हिसाब किताब चुकता होने वाला है " । और वही बीजेपी के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा की राहुल गाँधी चाहे 2 जगह से लडे , चाहे 4 जगह से लडे उनकी हार तय है ।

वहीं जेडीयु के नेता के सी त्यागी ने इस मुद्दे पर कहा की अमेठी का रण छोडने के बाद राहुल गाँधी रणछोड़ गाँधी बन गये है ।

अमेठी लोकसभा से कोन जितेगा और अगर राहुल गाँधी अमेठी और वायनाड दोनों सीटो से जीत जाते है तो वो कोनसी सीट को छोडेगे ये देखने वाली बात होगी ।

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